अक्तूबर 31, 2018

2019 में मोदी..


विश्लेषण का एक तरीका ये भी है, समझना हो तो मेरी नजर से भी एक बार देखिये। शायद उस आदमी को कुछ और गहराई तक समझ सकें जो आज इस देश के प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली सरकार लेकर बैठा है लेकिन फिर भी दुनिया के हर अपशब्दों, एक गिरे हुये स्तर की आलोचनाओं और निहायत ही घटिया स्तर के षड्यंत्रों का रोज ही सुबह शाम सामना कर रहा है। इसके बाद भी, मुस्कुराते हुये, बिना इन सबसे विचलित हुये अपने काम को अंजाम दिये जा रहा है। इंतेहा ये कि अब तो समर्थक भी उसके विरोध में मुखर हो चले हैं, गरियाये जाने का क्रम चालू है। विरोधी तो खैर विरोधी हैं ही अपने भी बगावत का झंडा उठाये तैयार हैं जैसे वे एक वोटर नहीं, मोदी की तकदीर के मालिक हैं, उसके भाग्यविधाता हैं।


हिंदुस्तानी जनता की याददाश्त चूंकि बहुत कमजोर होती है इसलिये हाल फिलहाल के कुछ तथ्य सामने रख रहा हूँ...याद रहे तथ्यों की बात कर रहा हूँ जिसे न तो झुठलाया जा सकता है और ना ही खारिज किया जा सकता है।

24 अक्टूबर रात 2 बजे जब CBI में छापा पड़ रहा था और टॉप के दोनों उच्चाधिकारियों को छुट्टी पे भेज दिया गया, उस समय प्रधानमंत्री मोदी का जनता के समक्ष क्या कर रहे थे ..... महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दे रहे थे, वैष्णव जन तो तेने कहिये का मतलब समझा रहे थे। क्या कहीं से आपको लगा कि वे सीबीआई पे कितनी बड़ी कार्रवाई करने जा रहे है? और अगले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अक्टूबर को "मैं नहीं, हम" कार्यक्रम में दो घंटे भाग लिया, प्रतिभागियों के साथ ठहाके लगाए, उन्हें समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। उनकी बॉडी लैंग्वेज पे ध्यान दीजियेगा, वह आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति की थी, ना कि किसी बेबस, विवश और लाचार नेता की जबकि बाहर कांग्रेसी, भूषण और मीडिया का गुस्से के मारे मुंह से झाग निकला जा रहा था।

अभी जब सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर जैसे अहम मुद्दे पर सुनवाई कर रहा था मोदी इन सबसे बेखबर बने पाकिस्तानियों को जवाब देने की प्लानिंग कर रहे थे। याद करिये 2014 से पहले के तमाम न्यूज़ चैनलों की क्लिपिंग्स, पुराने अखबारों की कतरनें जब समाचार भरे पड़े रहते थे कि आज पाकिस्तानी सैनिकों ने द्रास सेक्टर के अंदर हमला किया, आज अखनूर सेक्टर पर गोलाबारी की, आज बारामुला में घुसपैठ हुई और चैनल वाले उनके गोले दिखा दिखा कर कितने निर्दोष नागरिक मारे गये इसकी गिनती बताया करते थे और तब की सरकारों में इतनी हिम्मत नहीं थी कि LOC के पार जाकर कुछ करने की सोच भी सके। कल क्या हुआ? सीमा पार सिर्फ पाकिस्तानी सैनिकों की चौकियों को ही नहीं, बल्कि POK स्थित हाजिरा में पाकिस्तानी सेना के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड क्वार्टर को भारतीय सेना ने धुएं में उड़ा कर रख दिया। सेना के हेड क्वार्टर पर हमले का मतलब तो समझते ही होंगे ना ? ये फर्क पड़ा है इस आदमी के आने से।

भगवान राम के ही दूसरे स्वरूप श्रीकृष्ण ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युद्ध और राष्ट्रविभाजन में से किसी एक को अगर चुनना पड़े तो हमेशा युद्ध को ही चुनो।

अब पाँच वर्ष पीछे चलिए। वर्ष 2013 में कोंग्रेसियों ने देश का खज़ाना खोल दिया था; वित्तीय घाटा 4.5 प्रतिशत हो गया था यानि कि कांग्रेसी आमदनी से कही अधिक खर्च कर रहे थे और मंहगाई 10 प्रतिशत से अधिक थी, अर्थात कांग्रेसी नोट छाप रहे थे, जिससे बाजार में मांग से अधिक रूपया आ गया था क्योकि उन्हें पता था कि वे चुनाव हारने जा रहे है और वे पैसो के द्वारा जनता का वोट खरीदना चाहते थे, भले ही अर्थव्यवस्था गर्त में चली जाए।

वर्ष 2018 में क्या स्थिति है? चुनाव 6-7 महीने में होने वाले है. मंहगाई 4 प्रतिशत और वित्तीय घाटा 3.3 प्रतिशत के आस-पास है।क्या आपको लगता है मोदी ऐसी सुदृढ़ अर्थव्यवस्था चोरों के लिए छोड़ने जा रहे है?
अगर आप ऐसा सोचते है तो यकीन जानिये आप बहुत गलत ट्रैक पर सोच रहे हैं।

मोदी अगर कार्यवाई नहीं कर रहे है तो वह इसलिए कि वह राष्ट्र की प्रगति को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करना चाहते। अगर किसी को लगता है कि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुये भी मोदी के पास देश विरोधी और उसे तोड़ने का मंसूबा पालने वाली शक्तियों का कच्चा चिट्ठा नहीं है, तो वे स्वप्निल दुनिया में रह रहे हैं। अगर किसी को लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी के पास कार्रवाई करने की दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं है तो वे JNU के पैम्फलेट पढ़ रहे है। यह मत भूलिए कि कांग्रेस के द्वारा पोषित यही विपक्ष, मीडिया और अदालत मुख्यमंत्री रहते उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई थी जबकि कोई ऐसे समवैधानिक संस्था, कोई सरकारी एजेंसी ऐसी नहीं बची थी जो मोदी के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से न लगी हो।

मैं बार बार ये कहता रहा हूँ कि मोदी कांग्रेसियों द्वारा पोषित भ्रष्ट आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था का रचनात्मक विनाश कर रहे है, तो वह गलत नहीं है। आपको क्या लगता है कि पिछले कुछ दिनों से कौन लोग सनातन मूल्यों पे चोट पंहुचा रहे है? क्या ऐसे भ्रष्ट व्यवस्था का विनाश लिए बिना हम सनातन मूल्यों की स्थापना कर सकेंगे?

मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी कार्रवाई चुनाव के पूर्व करेंगे लेकिन उसका समय और स्थान वह स्वयं तय करेंगे, क्योकि ऐसी कोई भी कार्रवाई कुछ समय के लिए व्यवस्था को उलट-पलट देगी। लेकिन फिर एक नयी सरकार के मुखिया के नाते वह व्यवस्था को सही पटरी पर ला देंगे। आप एक बार अपने प्रधानमंत्री पर भरोसा कर के तो देखिये।

मोदी के काम करने की अपनी एक विशिष्ट शैली है, अपना एक अंदाज है और उसके बारे में पूर्वानुमान लगाना किसी के लिये भी मुश्किल ही नहीं असम्भव है। ये इंसान चौंकाने वाले निर्णयों को लेने में माहिर है। ठंड रखिये तकदीर पलटने के लिये एक लम्हा ही काफी होता है।

अंत में दो बातें और - पहली तो ये कि राम मंदिर तो बन कर रहेगा, कोई चाहे तब भी, ना चाहे तब भी और दूसरी ये कि ये सरकार भी अगले साल दोबारा लौट कर आयेगी वो भी पूरे गाजे बाजे के साथ, जिसे जो करना हो कर के देख ले।


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