अक्तूबर 26, 2018

खबर से सावधान...

वर्तमान डिजीटल युग कोई खबर चंद मिनटों में पृथ्वी के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँच जाती है। आजकल टी० वी० चैनलों के तरह तेज, सबसे पहले, ताजा खबरें पहुँचाने का वादा करने वाले लाखों ग्रुप वाट्सएप, फेसबुक जैसे हजारों सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चल रहे हैं।
इसी कड़ी में आधुनिक ट्रेंड बन रहा है, ऑनलाईन खबरों का। अपने सोशल मीडिया ग्रुप, पेज, बेबसाईट को ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय करने के लिए साधारण खबरों को मसालेदार बनाकर परोसना इनकी मजबूरी है। हम सनसनी, मसालेदार खबरों को ध्यान से पढ़ते भी हैं और शेयर भी करते हैं और यही वे चाहते भी हैं। 
किसी सनसनीखेज मसालेदार खबर पर विश्वास करने और शेयर करने से पूर्व कुछ मुख्य बिंदु को गौर जरूर कर लें। जैसे-
1. खबर जिस माध्यम से आपतक पहुँच रही है, उसके स्वयं की विश्वसनीयता कितनी है?
2. यदि कोई विश्वसनीय व्यक्ति या ग्रुप के माध्यम से आपको कोई खबर लिंक के माध्यम से या कॉपी-पेस्ट मिलती है तो मूल खबर देने वाला ग्रुप, पेज या बेबसाईट कितना विश्वसनीय है?
3. इन पेज, ग्रुप या बेबसाईट चलाने वाले कौन लोग हैं और कितने विश्वास के योग्य हैं? समाज में उनकी छवि कैसी है? उनका पेशा क्या है? 
4. खबर में आरोपित व्यक्ति, संस्था, प्रतिष्ठान का पक्ष है या नहीं? 
5. खबर किसी संस्था, व्यक्ति या प्रतिष्ठान के छवि पर कुठाराघात तो नहीं करता?
6. खबर में किसकी हानि, कितनी हानि और किसका लाभ और कितना लाभ है?
ऐसा ही मसालेदार खबर का एक उदाहरण हमारे संज्ञान में आया है। दिनांक 24/10/2018 को पतंजलि के बहुत एक्सपायर समानों को कंपनी पदाधिकारियों की देख-रेख में पूर्णियॉं शहर से बाहर बेलोरी सतारी नहर के पास एक नीजी जगह में जलाया गया। पूर्णियॉं शहर से समानों को ले जाना, उसकी मिलान कर गिनती करना, उसका रिकार्ड रखना, उसका फोटो लेना- बहुत से काम करके उत्पाद को नष्ट किया जाता है। इतने काम करने में शाम हो गया और समान को नष्ट किया जाने लगा। समानों को नष्ट करते-करते देर रात हो गई और मजदूर थकावट के मारे काम करने में असमर्थ हो गये तो बचे कुछ समानों को अपनी ही जमीन में छोड़ जमीन मालिक बॉंकी समान अगले दिन जलाने का प्लान बनाकर घर चले गये। सुबह अगल-बगल के कुछ लोगों ने सूनसान जगह पर समानों को देखा तो हराम का माल समझ लूट लिये। कुछ ही देर में यह खबर तथाकथित स्वयंभू खबरियों को मिली तो उन्होंनें लूट में अपना हिस्सा नहीं मिलते देख पतंजलि के डिस्ट्रीब्यूटर को ब्लैकमेल करने की चाल चली। लेकिन पतंजलि में दो नंबर का काम होता ही नहीं तो फिर कोई लुटाये क्यों? जब पतंजलि डिस्ट्रीब्यूटर ने कोई नजराना देने से सख्ती से मना कर दिया तो उन्होंनें पतंजलि और उसके डिस्ट्रीब्यूटर को बदनाम करने के लिए सनसनीखेज मसालेदार खबर चलाई। लेकिन गलत लोग हमेशा गलती कर जाते हैं, वही इस खबर में भी हुआ। खबर में बताया गया है कि 

लाखों का पतंजलि प्रोडक्ट 3 बजे सुबह चुपके से जलाया
(इन नकली खबरिचियों को खबर देते तब चुपके से नहीं होता?)

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बेलौरी सतासी नहर के समीप खाली पड़े जमीन में पतंजलि के लाखों के प्रोडक्ट को एक डिस्ट्रीब्यूटर ने चुपके से जला दिया। सभी सामानों को जलाने के लिए जो समय चुना गया वह संदेह के घेरे में है।(दिन में जलाते तो कहते गरीबों में बॉंट देते, जलाया क्यों?, बॉटते तो कहते एक्सपायरी समानों को बॉंटा क्यों? जलाया क्यों नहीं? गरीबों के साथ मजाक!)  रात्रि 3 बजे के आसपास करीब 50 लाख (लगता है खबरिये की ही पूंजी लगी थी!इसलिए दाम का पता है!) के सामान को पैट्रोल डालकर (पानी डालकर जलाना था?) चुपके से (इनको खबर नहीं की, नजराना नहीं दिया इसलिए चुपके से?) जला (जलाते नहीं तो करते क्या?) दिया गया। सभी सामानों को जलाने में इतनी जल्दबाजी( दो-चार दिन बैठकर जलाना था?) थी कि अधिक मात्रा में पेट्रोल डाल आनन फानन में जला दिया गया। जिसके वजह से पास के कई लोगो का फसल झुलस गया।(झुलसी फसलों का फोटो लेने से किसी ने मना किया था?) इसके अलावा पास के पोखर में कई लिक्विड सामानों को खोलकर(बोतल सहित पानी में फेंकना था कि यही चिल्लाते की पानी में बोतल क्यों फेंका!) पानी मे बहा दिया गया। सभी सामानों को लाने के लिए ट्रैक्टर ( मोटर साइकिल का करना था क्या?) का इस्तेमाल किया गया था। जिस जगह सामानों को नष्ट किया गया, वहाँ जाने के लिए रास्ता नहीं था।(जमीन अबादने हवाईजहाज से ट्रेक्टर जाता था?)  इस दौरान फसल लगे खेत होकर जाने से किसानों का फसल भी रौंदते हुए चला गया। जैसे ही धीरे धीरे सुबह होता गया कई प्रोडक्ट को छोड़कर भाग गए। सुबह होने पर धुँआ उठता देख जब ग्रामीण गए तो घटना का पता चला। स्थानिय ग्रामीण कुछ भी कहने से परहेज कर रहे है। ( तो तुम्हारे पेट में दर्द क्यों?) वहीं कुछ लोगो ने नाम नही छापने (कहॉं छापते हो? अपने आपको अखबार समझने लगे क्या?) की शर्त पर बताया कि जिसने यह सामान जलाया है जमीन उसी की है।( मतलब जिसका जला, जिसने जलाया, जिस समाज में जलाया उन्हें कोई कष्ट नहीं है) जिनलोगों का फसल नष्ट हुआ है उसे मुआवजा देने की बात कही गई है, जिस वजह से सभी मामले को रफा दफा करने में लगे हुए है। ( खबरियों को मुआवजा नहीं मिला, इसलिए पेट दर्द हो रहा है?)
रात्रि 3 बजे सामानों को जलाना संदेह उत्पन्न कर रहा है। अगर समान एक्सपायर हो गई थी तो उसे दिन में शाम में भी जलाया जा सकता था, मगर 3 बजे रात में जलाना किसी को पच नहीं रहा है।(जलाना शुरू कब हुआ?) आखिर उसे इनकम टैक्स का डर था या सेलटैक्स का, या फिर सामान ही नकली था? यह बताना मुश्किल है। ( इतना बता दिये तो यह बताना मुश्किल क्यों?) लाखों का सामान किसने जलाया यह भी पता नहीं चल रहा है।(पूरी रामायण बीत गई, अब कह रहे सीता किसकी पत्नी! पहली ही लाईन में आपने बताया कि पतंजलि का डिस्ट्रीब्यूटर, बीच में बताया जमीन उसी की, नीचे बताया पूर्णियॉं डीएससी ग्रांउड के समीप पतंजलि के किसी होलसेलर का) वहीं कुछ ग्रामीण ने बताया कि यह सारा माल पूर्णिया डीएससी ग्राउंड के समीप पतंजलि के किसी होलसेलर (वहॉं पतंजलि के दो-चार सौ होलसेलर हैं क्या?) है।
इसके अलावे भी कई सुराखें इस खबर में है। वैसे हम ऐसे सनसनी भरे बेबुनियाद खबर का संज्ञान नहीं लेते हैं, लेकिन आपके सामने किसी तथ्य को किस तरह पेश किया जा सकता है, हम केवल एक उदाहरण दे रहे हैं। पतंजलि आयुर्वेद लि० हमारा अनुसांगिक संगठन है, इसलिए हम इस खबर का पूर्ण खंडन करते हैं। पतंजलि उत्पादों के वितरण का इतना मजबूत व्यवस्था है कि कोई नकली उत्पाद बाजार में आ ही नहीं सकता। 105610000000/- (10561 करोड़) ₹ सलाना टर्नओवर वाली कंपनी का कोई नकली उत्पाद आजतक नहीं मिला तो इस खबर में बिना किसी जॉंच के नकली उत्पाद की बात घुसेरने की मंशा केवल और केवल ग्राहकों के बीच नकली का भ्रम फैलाने की है। खबर के कई एंगल हैं। इसलिए आग्रह है कि कोई खबर पर विश्वास करने से पूर्व उसकी तहकीकात कर लें और सच्चाई जाने बिना किसी खबर को शेयर न करें।



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