नवंबर 24, 2018

7 को कहा हो गया, 31 को कहा हो रहा है

बिजली विभाग द्वारा जानकीनगर के उपभोक्ताओं से शहरी दर पर बिजली बिल लेने का हमने न केवल तीव्र प्रतिकार किया, बल्कि ग्रामीण दर पर बिजली बिल लेने के लिए मजबूर भी कर दिया।
हमारे पास पुख्ता सबूत हैं, बिजली विभाग के पदाधिकारी के गलत बयानी का।


सहायक विधुत्त अभियंता, बनमनखी 07 अक्टूबर 2018 को लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बनमनखी को लिखित रूप से प्रतिवेदित करते हैं कि- "परिवादी के वाद के अनुसार एन०डी०एस० 2 से एन०डी०एस० 1 एवं डी०एस० 2 से डी०एस०-1 कर दिया गया है।"
हमने बिजली विभाग के पदाधिकारी के गलत बयान का न केवल प्रतिकार किया, बल्कि तथ्य, तर्क और प्रमाण सामने रख दिया। 
अपनी ही गर्दन फंसते देख पदाधिकारी ने अपने अपने ही पूर्व के लिखित बयान से पलटते हुए 31/10/2018 को प्रतिवेदन दिया कि-


"सी०एस०2 से सी०एस० 01 एवं डी०एस० 2 से डी०एस०1 करने की प्रक्रिया जारी है। अगले माह का विपत्र (बिल) निर्गत होने तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी।" 
मतलब 23 दिन पहले विभागीय पदाधिकारियों ने लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को झूठा प्रतिवेदन दिया था!

मतलब हमारी बात सौ टके सही थी, इसे बिजली विभाग भी मानता है। 
अब जबकि विभाग मान चुका है कि जानकीनगर में गलत बिल की वसूली की गई है, कब हम वसूल की गई राशि की वापसी के लिए क्यों नहीं लडें?
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