नवंबर 11, 2018

पतिव्रता

*छठवां प्रश्न: सती सक्कूबाई, सती अनसूया, सती सावित्री जैसी महान पतिव्रता साध्वियों की महिमा का शास्त्रों में बहुत उल्लेख है। आपकी दृशिट में पतिव्रता का क्या अर्थ है?*

*ओशो..*🎤💖🕺🏼

_*सुशीला! पतिव्रता का अर्थ होता है.. जो पति से बहुत तरह के व्रत करवाए। कि आज सोमवार है, आज एकादशी है, यह पर्युषण आ गया... करो व्रत! पतिव्रता का मतलब साफ है कि पति के पीछे पड़ी रहे कि सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठो, कि जाओ अब घूमने, कि सिगरेट न पीओ, कि चाय न पीओ, कि ताश न खेलो, कि सिनेमा न देखो, कि यह न करो, कि वह न करो.. जो पति के पीछे ही पड़ी रहे; जो पति का सुधार करने में लगी रहे; जो पति को व्रती बना कर रहे.. उसका नाम पतिव्रता। सीधा-सादा शब्द है! इसमें क्या अध्यात्म खोजने में लगी है सुशीला तू?*_

_*पुरुष यह काम करता रहा और स्त्रियों को समझाता रहा कि हम पुरुष हैं, हमें सब तरह की स्वतंत्रता है। तुम्हारा गौरव तो इसी में है... समर्पण। तुम तो डूब मरो। तुम तो जीवन भर भी अपना जलाओ और अगर हम मर जाएं तो हमारे साथ मर जाओ।*_

_*पुरुष को हक है कि एक नहीं, कई स्त्रियां रखे। मुसलमान चार स्त्रियां रख सकते हैं। मोहम्मद ने खुद नौ विवाह किए। मगर यह मोहम्मद तो कुछ भी नहीं, कृष्ण ने सोलह हजार स्त्रियां! बेचारे मोहम्मद का कहां हिसाब, कहां किस हिसाब में आते हैं! तुलना कर ही नहीं सकते। सोलह हजार स्त्रियां!*_

_*पुरुष जो करे, ठीक! पुरुष की दुनिया है यह। अब तक रही है, आगे नहीं रहनी चाहिए। स्त्री और पुरुष का समान अधिकार है। और दोनों को सब तरह से समानता मिलनी चाहिए। न तो पतिव्रता होने की कोई जरूरत है, न पत्नीव्रता होने की कोई जरूरत है। काफी अनाचार हो चुका इन शब्दों की आड़ में...क्रमशः*_

*रहिमन धागा प्रेम का प्रवचन-01*


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