नवंबर 05, 2018

कामवासना

कामवासना कोई पाप तो नहीं ।अगर पाप होती तो तुम न होते । पाप होती तो ऋषि-मुनि न होते ।पाप होती तो बुध्द महावीर न होते ।पाप से बुध्द और महावीर कैसे पैदा हो सकते हैं ?पाप से कृष्ण और कबीर कैसे पैदा हो सकते हैं ?
और जिससे कृष्ण और कबीर , बुध्द और महावीर , नानक और फरीद पैदा होते हों, उसे तुम पाप कहोगे ? जरुर देखने में कहीं चूक है , कहीं भूल है । कामवासना तो जीवन का स्त्रोत है । उससे ही लडो़गे तो आत्मघाती हो जाओगे । लडो़ मत , समझो । भागो मत , जागो । मैं नहीं कहता कि कामवासना छोड़नी है ; मैं तो कहता हूं समझनी है , पहचाननी है । और एक चमत्कार घटित होता है ; जितना ही समझोगे उतनी ही क्षीण हो जाएगी , क्योंकि कामवासना का अंतिम काम पूरा हो जाएगा । कामवासना का अंतिम काम है तुम्हें आत्म-साक्षात्कार करवा देना । तुम हैरान होओगे मेरी बात सुनकर । इसलिए तो मुझे गालियां दी जाती हैं । कामवासना का पहला काम है तुम्हें जीवन देना और दूसरा काम है तुम्हें जीवन के स्त्रोत से परिचित करा देना । बस दो काम पूरे हो गए कि कामवासना अपने आप चली जाती है  सीढी़ के तुम पार हो गए , अब सीढी़ की कोई जरुरत न रही । परमात्मा उसे खुद खींच लेता है । जैसे दी है वैसे ही खींच लेता है । न तुमने बनाई है , न तुम मिटा सकते हो --- इतना मैं तुमसे कहे देता हूं । जिसने बनाई है वही मिटा सकता है । तुम उपयोग कर लो । एक काम तो हो गया है कि तुम्हें जीवन मिल गया , अब दूसरा काम बाकी रह गया है , अधूरा है । अगर उसे पूरा न किया तो फिर-फिर आना पडे़गा , फिर-फिर आना पडे़गा । दूसरा काम है कि अब कामवासना को समझने में लगो कि यह है क्या । और निंदा मत करना ।  निंदा की तो समझोगे कैसे ? दुश्मनी कर ली पहले से तो फिर आंखें ही न मिला सकोगे । निष्पक्ष भाव से समझने की कोशिश करो , यह कामवासना क्या है । इसके साक्षी बनो । और जिस दिन तुम पूरे साक्षी हो जाओगे , चमत्कार घटित होता है : कामवासना तिरोहित हो जाती है । फिर तुम लाना भी चाहो तो नहीं ला सकते । लडो़ मत । लडा़ई अति है । एक अति है कामुक व्यक्ति की , जो चौबीस घंटे कामवासना में डूबा हुआ है ; दूसरी अति है ब्रह्मचारी की कि चौबीस घंटे लड़ रहा है । मगर दोनों का केन्द्र कामवासना है । कामवासना बडा़ रहस्य है जीवन का , सबसे बडा़ रहस्य । उसके पार बस एक ही रहस्य है --- परमात्मा का ।

Osho 


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