जनवरी 15, 2019

2400 घंटे

आज के दौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति को हर चीज हो सकती है- केवल एक को छोड़कर! वह है समय।
आज जिसे पूछिये, देखिये- सभी कहते हैं समय नहीं है। 
आखिर, क्यों, कब और कैसै?
1990 के दशक में जब मोबाईल नहीं था, आज की तरह तेज रफ्तार संसाधन नहीं था, आज की तरह दौड़ नहीं थी। आज आप कोई भी आयोजन कीजिए, आने वाले को एक काम लगता है, पहले आने का शौक था।
यह तो हुई वर्त्तमान बात। अब अाते हैं कि हमारा समय जा कहॉं रहा है। हम क्या पा रहे हैं और क्या खो रहे हैं?
सबसे पहले तो यह सोचकर देखिए कि हम अपने व्यस्त समय के लिए सबसे पहली कटौती कहॉं करते हैं?
धर्म! जी हॉं। हम अपने काम के लिए सबसे पहली समय की कटौती धार्मिक कार्यों के समय में करते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि उसे बाद में भी कर सकते हैं।
उसके बाद...
भोजन। जी हॉं। समय की कमी के कारण हम भोजन से विमुख हो रहे हैं। असमय कुछ भी किसी तरह खाकर काम चलाना हमारी आदत में शुमार होता जा रहा है। 
उसके बाद वाणी...।
जी हॉं। आपको महसूस नहीं होता हो, यह अलग बात है, लेकिन हमारे वाणी में क्या वह मिठास रह गई है, जो हमारे माता-पिता में है? गौर कीजिए! जिस तरह हमारे माता-पिता अपने माता-पिता से बात करते थे, क्या हम अपने माता-पिता से उस स्थिरता से बात कर पाते हैं? धन-दौलत से बिछावन खरीदा जा सकता है, नींद नहीं। दवाई खरीदी जा सकती है-निरोगी काया नहीं।

अागे हम यही कहना चाहते हैं कि हमारा आहार, विचार, वाणी, व्यवहार और अभ्यास दूषित हो चुका है और हम कहॉं पहुँच चुके हैं, यह देखने की फुर्सत हमें खुद नहीं है।
पैसा भले हमारे जेब से बैंक तक हो, जमीन-मकान खरीद लिये-लेकिन क्या हमारा शरीर हमारे माता-पिता से ज्यादा स्वस्थ और सुंदर है? हमारे बच्चे का शरीर आज भले ही स्वस्थ और सुंदर दिखाई देता हो, कल को हमसे पहले वे कमजोर हो जायें तो कोई आश्चर्य नहीं। 
हम हर काम करें, लेकिन हमारा मूल संसाधन हमारा शरीर है, इसपर भी ध्यान दें। हमारा आहार, विचार, वाणी, व्यवहार और अभ्यास सही हो तो फिर हमारा जीवन सफल है।
जब देश का प्रधानमंत्री प्रतिदिन एक घंटा अपने शरीर पर ध्यान दे सकता है तो हम और आप क्यों नहीं?
यह मानवीय व्यवहार की बात है कि जो काम हम लगातार 21 दिन करते हैं, वह हमारे अभ्यास में शामिल हो जाता है। आपके लिए भी एक सुनहला अवसर है, एक अच्छा अभ्यास को अपनी जिंदगी में शामिल करने का। 
पूर्णियॉं में 25 दिवसीय सहयोग प्रशिक्षण शिविर 26 जनवरी 2018 से प्रारंभ हो रहा है। आपको इस शिविर में भाग लेने से-
1. अपके स्वास्थ पर खर्च शून्य होगा।
2. आप सभी रोग से बिना किसी खर्च से बचेंगें।
3. डॉक्टर और हॉस्पिटल जाने का समय बचेगा।
4. बीमार नहीं होंगें तो किसी पीड़ा या कष्ट नहीं होगा।
5. आप सहयोग शिक्षक बनेंगें।
6. आपका आहार, विचार, वाणी, व्यवहार और अभ्यास शुद्ध होगा।
7. आप सफल और स्वस्थ जीवन जी पायेंगें।
8. आप पच्चीस दिन 4 घंटे का समय (कुल 100 घंटे)दीजिए। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि आपको 100 दिन (2400 घंटे) की बचत होगी।



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