जनवरी 24, 2019

काली बिल्ली मिलेगी, तब तारीख तय होगी बेटे के शादी की


जानकीनगर में एक बेटे की शादी की तिथि तब ही तय होगी, जब परिवार को एक काली बिल्ली मिलेगी। इस परिवार में कई पुश्तों से यह परंपरा चली आ रही है कि बिना काली बिल्ली को घर में बॉंधे इस परिवार में कोई शादी सम्पन्न नहीं होता है। अब परिवार वाले काली बिल्ली खोज रहें हैं। 
इस परंपरा के पीछे कारण यह है कि कई पुश्त पहले इस परिवार के परदादे को काली बिल्ली पालने का शौक था। घर में शादी-विवाह जैसे शुभ मुहूर्त में काली बिना देखना अपशगुन माना जाता था और घर में ही काली बिल्ली! कब किधर से निकल जाये, कोई ठीक नहीं! तो बिल्ली को बॉंधकर रखना सबसे अच्छा उपाय था। अब परिवार में बिल्ली है ही नहीं तो बिल्ली खोजकर बॉंधने के बाद ही शादी की तारीख तय करने करने वाले को .... ही समझा जा सकता है न?
ठीक यही कहानी बिजली विभाग के पदाधिकारी दोहरा रहे हैं। वर्षों पूर्व बनमनखी शक्ति उपकेन्द्र से जानकीनगर, सरसी,  पीपरा, औराही फीडर में बिजली आपूर्ति की जाती थी। बनमनखी शक्ति उपकेन्द्र में यह क्षमता नहीं थी कि हर फीडर को एकसाथ निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा सकती थी तो सबकी सहमति से एकान्तर से फीडरों में बिजली की आपूर्ति की जाती थी।
समय के साथ जानकीनगर में बिजली शक्ति उपकेन्द्र की स्थापना हुई। आज केन्द्र में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है, हर फीडर को लगातार बिजली दी जा सकती है, लेकिन बिल्ली बॉंधने की बात यहॉ भी आती है! बनमनखी में यही नियम था, इसलिए जानकीनगर में भी यही मियम लागू होगा! हमने सहायक विद्युत्त अभियंता, बनमनखी से इस बारे में कई बार जबाब मांगा, लेकिन वे लिखित जबाब देने को तैयार नहीं हैं। यदि बिजली विभाग का कोई नियम कहता है कि जानकीनगर में 18 घंटा से ज्यादा बिजली नहीं दी जा सकती है तो पदाधिकारी उस नियम को हमारे सामने लायें, हम सरकार से नियम बलदवा लेंगें!
अरे भैया! नियम होगा कहॉं से? बगल के मधेपुरा, सहरसा, सुपौल जिले के सदूर देहात में आपके कोई रिश्तेदार या जान-पहचान वाले होंगें हीं। आप फोन करके पूछ लीजिये। कम से कम 22 से 23 घंटा बिजली उपलब्ध है! जी हॉं, देहात में। जेनरेटर, बैट्री-इन्वर्टर वाले अपना धंधा बदल चुके हैं! क्या वहॉं दूसरा बिजली विभाग है? जानकीनगर शक्ति उपकेन्द्र में बिजली उपलब्ध नहीं रहती तो दूसरी बात थी! बिजली उपलब्ध है, लेकिन पदाधिकारी की मनमानी है! लगता है अब कागज से हटकर सड़क पर संधर्ष करना पड़ेगा, तब ही विभागीय पदाधिकारी समझने को तैयार होंगें!