फ़रवरी 01, 2019

बैंक ने मानी अपनी गलती, हमारा दावा है ठीक।

बिजली विभाग द्वारा जानकीनगर के ग्रामीण उपभोक्ताओं से शहरी दर बिजली बिल लेने के हमारे विरोध पर समाज के कुछ हल्के दिमाग वालों ने पीठ पीछे हमारा विरोध किया था। तब भी हमने संयम से काम लेते हुए “हाथी चले बाजार, कुत्ता भूके हजार” नीति अपनाते हुए अपना संधर्ष जारी रखा। जिसका परिणाम हुआ कि बिजली विभाग को हमारे विरोध पर पुन: ग्रामीण दर पर ही बिजली बिल लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।


हमारे सदस्य पंकज कुमार ने दिनांक 21/01/2019 को अपने एस० बी० आई० बैंक खाते का चेक नंबर- 541526 से मानवेन्द्र कुमार को 5000/-(पॉंच हजार रूपये) भुगतान किया। जब श्री कुमार ने भारतीय स्टेट बैंक, चोपड़ा बाजार शाखा में चेक का नकद भुगतान के लिए चेक प्रस्तुत किया तो उसे यह कहकर नकद भुगतान देने से मना कर दिया गया कि चेक के पारपृष्ठ पर चेक जारीकर्त्ता पंकज कुमार ने मानवेन्द्र कुमार के हस्ताक्षर को सत्यापित नहीं किया है, इसलिए इस चेक का नकद भुगतान नहीं किया जा सकता है।
        
अपने चेक के भुगतान को गैर-कानूनी रूप से रोकने से मर्माहत पंकज कुमार जब खुद शाखा पहुँचे तो सहायक रोकड़िया श्री अजय कुमार ने अपनी रटी-रटाई बात सुनाते हुए उनकी बात को सुनने से मना कर दिया। शाखा प्रबंधक की अनुपस्थिति में उन्होंनें शाखा के वरिष्ठ दूसरे पदाधिकारियों से इस मामले में बात की। यदि बैंकिंग नियम से उनके चेक का भुगतान नहीं किया जा सकता है तो उन्होंनें अपने चेक का अनादर करने की बार-बार गुहार लगाई, लेकिन वे न तो चेक का भुगतान देने को तैयार हुए और न ही वे चेक का अनादर करने के लिए तैयार हुए, जो पूरी तरह बैंकिंग नियमों के ठीक विपरीत है। इस पूरे घटनाक्रम का विडियो यूट्यूब लिंक https://youtu.be/bSR44oI5S4c पर उपलब्ध है, जिसे आप देख सकते हैं। भारत स्वाभिमान ने मामले में पंकज कुमार के पक्ष को सही मानते हुए उनका समर्थन किया।


आज दिनांक 01/02/2019 को पंकज कुमार के मामले की जॉंच के लिए भारतीय स्टेट बैंक के उच्चाधिकारी चोपड़ा बाजार शाखा आये। संबंधित सभी पक्षों से बात करने के बाद शिकायतकर्त्ता पंकज कुमार का भी पक्ष लिया गया। जॉंच अधिकारी ने प्रथम दृष्टतया न केवल शिकायत को सही पाया, बल्कि शिकायतकर्ता की बात सही और बैंककर्मी की बात गैर-कानूनी मानी।
छोटे ही स्तर पर सही, यह हमारी जीत है। हमारी ही बात कानूनी रूप से सही हुई।
चेक जारीकर्त्ता को चेक के पीछे हस्ताक्षर करने या नहीं करने का विवेकाधिकार है। जारीकर्त्ता चाहे तो चेक के पीछे भुगतान लेने वाले का हस्ताक्षर सत्यापित करे या न करे, यह उसका विवेकाधिकार है। बैंक इसके लिए चेक जारीकर्ता को बाध्य नहीं कर सकता है। बैंक प्रबंधन ने अपनी गलती मानी है। अब आप भी जान लीजिए कि चेक पर खाताधारक का एक हस्ताक्षर चेक के नकद भुगतान के लिए पर्याप्त है। चेक के पीछे खाता धारक के हस्ताक्षर के लिए बैंक किसी भी परिस्थिति में बाध्य नहीं कर सकता है।
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आप भी अपना चेक जारी करते हुए पीछे हस्ताक्षर करें और न ही किसी दूसरे से चेक लेते समय चेक के पीछे उसका हस्ताक्षर लें। चेक पीछे से सादा रहेगा और भुगतान प्राप्त करने वाला अपना दो हस्ताक्षर कर भुगतान प्राप्त कर लेगा। 



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