फ़रवरी 20, 2019

जानकी रूकेगी, जानकीनगर में?

       आज दिनांक 20/02/2019 को संध्या 4 बजे न्यू पब्लिक कान्वेंट के परिसर में जानकीनगर रेलवे स्टेशन पर जानकी एक्सप्रेस के ठहराव को लेकर एक बैठक हुई। बैठक का निर्णय इस प्रकार रहा-

बहुत समय पहले की बात है काफी दिनों से बारिस न होने की वजह से एक गांव में सुखा पड़ गया. हर तरफ हाहाकार मच गया. पानी की कमी के कारण अब लोग मरने लगे थे. गांव में सिर्फ एक ही आचार्य थे जो सिर्फ पढ़े-लिखे थे. लोगों ने उनसे इस समस्या के समाधान के लिए उपाय खोजने को कहा.
       आचार्य ने सूखे को रोकने और गांव में बारिस हो जाए इसके लिए बहुत से प्रयास किये लेकिन कोई भी प्रयास सफल न हुआ. गांव में सूखे की समस्या पहले की तरह ही बनी रही. गांव के लोगों के सामने सभी रास्ते बंद हो चुके थे . वे बहुत दुखी हो चुके थे और हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करने लगे कि तू ही अब हमे मरने और तबाह होने से बचा सकता है.
         तभी वहां धगरण द्वारा भेजा गया एक दूत प्रकट हुआ और उसने गांव के लोगों से कहा अगर आज रात गांव के हर व्यक्ति उस कुएं में एक लौटा दूध बिना कुँए के अन्दर देखे हुए डाल देगा तो कल से ही आप के गांव में सूखे की समस्या ख़तम हो जाएगी और बारिस हो जाएगी. यह कहकर वह दूत वहां से गायब हो गया.
          गांव के लोग यह समाधान जान कर बहुत खुश हुए और उन्होंने सभी ग्राम वाशियों से कुएं के अन्दर बिना उसमे झांके एक लोटा दूध डालने का निवेदन किया. सभी लोग दूध डालने को तैयार हो गए.
रात को जब सभी लोग कुएं में दूध डालने लगे तब गांव का एक कंजूस व्यक्ति सोचा कि गांव के सभी लोग उस कुएं में तो दूध डालेंगे ही, अगर वह अकेला ही कुएं में एक लोटा पानी डाल देगा तो किसी को पता नहीं चलेगा. यह सोचकर उस व्यक्ति ने कुएं में एक लोटा दूध की जगह एक लोटा पानी डाल दिया .
           अगली सुबह तक लोगों ने बारिस का इन्तेजार किया. लेकिन अभी भी गांव में सुखा पड़ा हुआ था और बारिस का कोई नमो-निशान नहीं दिख रहा था. सब कुछ पहले जैसा ही था. लोग सोचने लग गए कि आखिर बारिस क्यों नहीं हुई. इस बात का पता लगाने के लिए गांव के बहार उस कुएं में देखने गए. जब उन्होंने कुएं में झांक कर देखा तो सभी के सभी हैरान रह गए. पूरा कुआँ केवल पानी से भरा था, उसमे एक बूँद भी दूध नहीं था.
            सभी ने एक-दुआसरे की तरफ देखा और तभी सब समझ गए कि सूखे की समस्या अभी तक समाप्त क्यों नहीं हुई.
            दोस्तों! ऐसा इसलिए हुआ था कि जो बात उस कंजूस एक दिमाग में आई थी कि सभी लोग तो दूध डालेंगे ही अगर वो एक लोटा पानी डाल देगा तो पता नहीं चलेगा. वही बात पूरे गांव वालों के दिमाग में आई थी. और हर व्यक्ति दूध की जगह कुएं में एक लोटा पानी डाल दिया था.
            जो भी इस कहानी में हुआ वो आज कल इस जीवन में होना सामान्य बात होगई है. हम कहते हैं कि क्या एक के बदलने से क्या पूरा संसार बदल जाएगा. लेकिन एक बात याद रखिये कि बूँद-बूँद से ही सागर भरता है।
अगर हम दुसरे लोगों पर अपने काम की जिम्मेदारी डाले बिना, अपने काम को पूरी ईमानदारी और मेहनत से करें तो हम इस समाज में बदलाव लाने के लिए काफी है. 
आज की बैठक का यही हाल हुआ. आप ही नहीं, बहुतों ने सोच लिया कि एक हम नहीं जायेंगें तो क्या होगा? जानकीनगर रेलवे स्टेशन पर जानकी एक्सप्रेस के ठहराव की ईच्छा हर किसी को है, लेकिन फुर्सत नहीं है. यहॉं तक की समाज की दिशा और दशा तय करने वाले जनप्रतिनिधि भी नहीं दिखे.