फ़रवरी 23, 2019

सावधान! कहीं बिजली विभाग आपको भी लूट तो नहीं रहा!

कोई व्यक्ति यदि आपको छूरा दिखाकर कहे कि “मुझे 50/-₹ दो नहीं तो मैं आपके शर्ट-पैंट को फाड़ दूँगा।” आप इसे क्या कहेंगें? शायद लूट शब्द आपके दिमाग में आयेगा ही। यही लूट बिजली विभाग अपने उपभोक्ताओं के साथ कर रहा है। पहले जान-बूझ कर गलती करना और गलती को ध्यान में लाने पर उपभोक्ता को डांटकर भगाने का मामला प्रकाश में आया है।
बिजली विभाग में गड़बड़ी है, शायद ही कोई उपभोक्ता इससे इनकार कर सकता है। लेकिन, विभाग के लूट के नये-नये तरीके के खुलासे हो रहे हैं। ताजा मामला भारत स्वाभिमान के सदस्य मंटू कुमार भगत का है। पहले आप श्री भगत का बिजली बिल देख लीजिए-

हरे घेरे और लाल घेरे को ध्यान से देखने पर बिजली विभाग की गड़बड़ी आसानी से पकड़ में आ जा रही है। श्री कुमार का मीटर 12/02/2019 तक 4547 यूनिट बिजली खपत को दर्शाता है, जो कि सही भी है। जब बिजली विभाग का ही बिल कहता है कि 30/11/2015 तक इनका मीटर 902 यूनिट बिजली खपत कर चुका है। बिल के पीले घेरे में यह भी आपके देखने के लिए प्रस्तुत है-
दिसम्बर 2015 से जुलाई 2018 तक 32 महीने में विभाग प्रतिमाह 40 यूनिट की दर से 1280 यूनिट और उससे पहले 902   यूनिट अर्थात कुल 2200 यूनिट का बिजली बिल ले चुका है। 12/02/2019 तक 4547 यूनिट बिजली का खपत हुआ है तो अब विभाग को 4547-2200=2347 यूनिट का ही बिजली बिल लेना चाहिए। लेकिन केवल अगस्त 2018 से फरवरी 2019 तक का ही बिल 4837 यूनिट का है। अर्थात केवल 7 महीने में 2490 यूनिट का अधिक बिजली बिल है। बॉंकी 25 महीने में कितनी लूट की गई यह तो विभाग ही बता सकता है।
जब मीटर लगा हुआ है, मीटर चल रहा है तो जितना मीटर उठा उतना का बिल विभाग ले, कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जिस बिजली का उपयोग उपभोक्ता ने किया ही नहीं है, उसका बिल क्यों दे उपभोक्ता?
आप भी अपने बिजली बिल पर ध्यान दें। जिस महीने आपके बिल में घोटाला किया जाता है, उस महीने बिल ही नहीं दिया जायेगा। अगले महीने बिल दिया जायेगा तो पिछला बॉंकी दिखाकर आपकी जेब काटी जायेगी।
बिजली का भुगतान नहीं करने पर विभाग बिजली काट दे, बकाये की वसूली के लिए मुकदमा करे, हमें शिकायत नहीं है। हमें आपत्ति इस पर है कि बिल भुगतान न करने पर उपभोक्ता की बिजली कागज पर काट दी जाती है, उपभोक्ता के घर पर कोई सूचना तक नहीं होती है। उपभोक्ता अपनी बिजली कटने से अनजान बिजली का उपभोग करते रहते हैं। कुछ महीने के बाद विभागीय पदाधिकारी उपभोक्ता के घर पहुँचकर तार काटते हैं और बिजली चोरी के मुकदमें से बचने के लिए मनमाने रकम की मांग करते हैं। मनमानी रकम नहीं मिलने पर थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाता है। हम इसके विरोधी हैं। उपभोक्ता की बिजली विभाग के कार्यालय में केवल कागज पर न कटे, उपभोक्ता को नियमानुसार लिखित चेतावनी दी जाय, बिजली उसके घर पहुँच कर काटी जाय और उपभोक्ता को इसकी नोटिस देकर उसकी पावती समाज के पॉंच व्यक्ति के समक्ष दी जाय। उसके बाद भी उपभोक्ता चोरी से बिजली उपभोग करते हुए पकड़ा जाय तो मुकदमा करने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, जिस विभाग को उसका खुद का हिसाब नहीं है, वह  उपभोक्ता को लूटना और प्रताड़ित करना बंद करे।
“एक तो चोरी, उसपर सीनाजोरी” यह कहावत सहायक विद्युत्त अभियंता, बनमनखी पर सटीक बैठती है। जब विभाग से पीड़ित श्री भगत जब सहायक विद्युत अभियंता, बनमनखी के पास 22 फरवरी 2019 को पहुँच कर गुहार लगाई तो AEE ने उन्हें डॉंटकर भगा दिया। हमें आशंका है कि श्री भगत का बिल सुधार नहीं कर बिजली चोरी का उपरोक्त षडयंत्र किया जा सकता है और इसके लिए हमें तैयार रहना है।