जुलाई 10, 2019

सूर्य अस्त, जनता पस्त, सरकार मस्त

पूर्णियॉं जिले के जानकीनगर के लोगों को जेहन में राष्ट्रीय आपदा घोषित 2008 की कोशी त्रासदी लोगों के जेहन में फिर ताजा हो चुकी है। उसका कारण जानकीनगर शाखा नहर की उफान है। तस्वीरें खुद आशंका को बयां कर रही हैं। ऐसे में लाखों एकड़ फसल पर लटकती खतरे की घंटी से क्षेत्र के किसान हकलान हैं, सरकार मस्त है कि त्रासदी के बाद राहत के नाम पर बंदरबांट का मौका तो मिलेगा!
जनता करे तो क्या! ग्रामीण अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार मिट्टी से तटबंध बचाने में लगे हैं। लेकिन यदि जल्द ही कोशी बैराज, भीमनगर से पानी का प्रवाह कम न किया गया और बोल्डरों से तटबंध को सुरक्षित नहीं किया गया तो लाखों किसान की कमर टूटनी तय है। करोड़ों रूपए महीना खर्च होने वाले कोशी परियोजना के पदाधिकारी मन ही मन खुश हैं कि तटबंध टूट जाने पर मरम्मति के नाम पर मोटी ठीकेदारी में कमीशन मिलने की आशा है।

फाटक बंद रहने के बाद भी वितरणी में जाता पानी

कुदाल और मिट्टी के भरोसे किसान

कभी भी टूट सकता है कई फाटक

लबालब भरा नहर